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अभी अभी
भूस्खलन हुआ है
जड़ जमाए तन कर रहने वाले
खड़े खड़े गिर गए दरख़्त
अभी अभी
शिखर गिरकर मलबा हो गया।
जो ऊँचाई में कम था
अब नया शिखर है
फिरहाल तो दिखाई दे रहे
उस पर विषैले सरीसृप।
पहाड़ को खोखला करने वाले
अँधेरी खाई में कहीं
ढूँढ़ रहे अपना अस्तित्व
तलहटी के सन्नाटे में।
-©अरुण तिवारी
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