POEMS टिकोरी की सुगंध आती है बसंत चढ़ने से पहले हम घुन बन चुके हैंकौआ बोला काँव काँवकबूतरीउर प्रेरणा बन स्फुटित होता हैदीर्घकालिक षड्यंत्रभारतीभिषेकमुंबई के बच्चेकच्चा लोकतंत्रशिव स्तुतिएक संदेशअभी अभीहे मानव पहचान मुझे फिर