लीक ना हो
इसलिए उधेड़ दिए जाते
हर बारिश के पहले खपरैल घर
खींच कर फेंक दी जातीं
सड़ गल चुकी लकड़ियाँ
लगे तो पूरी ठाट ही बदल दी जाती
लीक कर रहे खपड़े
ऊपर से फेंक दिए जाते
नीचे जमीन पर चकनाचूर
अधिक लीकेज से
ढह जाती है कच्ची दीवार
कच्ची उम्र, कच्ची व्यवस्था
काई जैसे जम जाते षड़यंत्र
ढह जाता कच्चा विश्वास
कच्चा लोकतंत्र।
इसलिए उधेड़ दिए जाते
हर बारिश के पहले खपरैल घर
खींच कर फेंक दी जातीं
सड़ गल चुकी लकड़ियाँ
लगे तो पूरी ठाट ही बदल दी जाती
लीक कर रहे खपड़े
ऊपर से फेंक दिए जाते
नीचे जमीन पर चकनाचूर
अधिक लीकेज से
ढह जाती है कच्ची दीवार
कच्ची उम्र, कच्ची व्यवस्था
काई जैसे जम जाते षड़यंत्र
ढह जाता कच्चा विश्वास
कच्चा लोकतंत्र।
-©अरुण तिवारी
